हमारे बारे में

बारे में

श्री नर नारायण सेवा महाप्रसाद

श्री गिरीशानन्द आश्रम ट्रस्ट पुष्कर धाम में सन् 1971 में पूज्य गुरुदेव ने अन्नक्षेत्र की सेवा प्रारम्भ की थी। जिसमे करीबन 100 से 150 तक सन्त, भिक्षुक,व निःसहाय लोगों को प्रतिदिन भोजन प्रदान किया जाता है । जो कि निरन्तर रूप से चल रहा है।

व आश्रम में सन्त , विद्यार्थी, व आनेवाले यात्रियों को रहने व भोजन की निःशुल्क व्यवस्था दी जाती है। शास्त्रों में अन्नदान को सबसे बड़ा दान बताया है, अपने जन्म दिवस ,विवाह की वर्ष गांठ व अपने पूर्वजों की तिथि के निमित्त आश्रम में भंडारे के द्वारा संत भिक्षुको को भोजन प्रदान कर सकते है।

एक दिन का खर्च 5100 रु मात्र

बारे में

श्री शाश्वत सेवा निधि योजना

इस योजना के तहत आश्रम के स्थाई सदस्य बनाए जा रहे हैं, सदस्यता के लिए दानदाता को
न्यूनतम ₹51000 व अधिकतम यथाशक्ति
अनुसार ट्रस्ट के मूलधन में जमा कराने होंगे, इस राशि के ब्याज की राशि से दानदाता के नाम से आश्रम में 1 दिन के संपूर्ण कार्य ,जैसे श्री देव पूजा अर्चना, वृद्ध साधु संत सेवा, विद्यार्थियों के लिए भोजन ,
श्री नरनारायण महाप्रसाद सेवा के द्वारा असहाय व्यक्तियों को भोजन की वर्ष में 1 दिन की व्यवस्था होगी इसी प्रकार प्रतिवर्ष निरंतर दान दाता के नाम से उनके जीवन पर्यंत व मृत्यु उपरांत भी हमेशा 1 दिन की सेवा होती रहेगी श्री गिरीशानंद आश्रम ट्रस्ट एक रजिस्टर्ड ट्रस्ट है ट्रस्ट के संविधान के अनुसार ,
श्री शास्वत सेवा निधि, में जो राशि जमा होगी उस राशि के ब्याज के ही रुपए का उपयोग हो सकेगा मूलधन हमेशा जमा रहेगा ट्रस्ट को दिया जाने वाला दान आयकर धारा 80G व 12A के तहत छूट प्राप्त है।

ट्रस्ट के मुख्य उद्देश्य निम्न प्रकार हैं

♦ साधु संत महात्माओं एवं दिन भूखे व असहाय व्यक्तियों को भोजन प्रदान करना ।
♦ जो साधु संत, वह ध्यान ,सत्संग ,साधना निमित्त आश्रम में रहना चाहे उन्हें आवास व भोजन प्रदान करना ।
♦ जो वानप्रस्थ गृहस्थ सपत्नीक आश्रम में भजन साधना हेतु रहना चाहे उनके भोजन व आवास की व्यवस्था करना।
♦ जो विद्यार्थी संस्कृत व वेदों का अध्ययन करना चाहें नियम पूर्वक रहे उनके लिए अध्ययन, आवास व भोजन की व्यवस्था करना ।
♦ आश्रम में गौशाला चलाना ।
♦ आश्रम में निशुल्क औषधालय चलाना ।
♦ आश्रम के द्वारा भारतीय संस्कृति व सनातन धर्म के विकास कार्य करना ।
♦ समाज के उत्थान के लिए कल्याण कारी कार्य करना ।
♦ संस्कृत विद्यालय या वेद विद्यालय चलाना ।

 

श्री गिरीशानंद आश्रम ट्रस्ट का आयकर विभाग में पंजीकरण कराया जा चुका है।

यह संस्थान आयकर धारा 80G व 12A के तहत कर मुक्त है। व यह संस्थान सीएसआर फंड के लिए भी स्वीकृत है ।

अतः समस्त भगवत अनुरागी सज्जनों से प्रार्थना है, कि आश्रम का लाभ उठाएं तथा संस्थान की मानव कल्याणकारी प्रवृत्तियों के संचालन हेतु अधिकाधिक धनराशि सहायता करके आश्रम के सफल संचालन में सहयोग कर यशस्वी बने ।

सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामया । सर्वे भद्राणि पश्यंतु मा कश्चित् दु ख भाग भवेत्।
Scroll to Top